
Crime News: मुकुंदपुर की तंग गलियों में रहने वाले एक परिवार की रातें कई महीनों से बिना नींद के कट रही थीं. उनकी 14 साल की बेटी, जो 21 सितंबर 2025 को अचानक गायब हो गई थी, अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला था. इस परिवार के लिए हर दिन अनकहे डर और उम्मीद के अजीब से संग्राम के बीच गुजर रहा था. भलस्वा डेयरी थाने में दर्ज अपहरण और गुमशुदगी के इस मामले ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की नींद भी उड़ा दी थी.
दिल्ली पुलिस ने बच्ची की तलाश के लिए 20,000 रुपये का इनाम घोषित किया था. मामला गंभीर था, वक्त की सुइयां तेजी से आगे बढ़ रही थीं और हर पल कीमती था. तभी इस केस की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच की टीम ने संभाली, जिसने ऑपरेशन मिलाप के तहत खोए हुए बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का मिशन छेड़ रखा था..एएसआई सुनील और महिला हेड कांस्टेबल सीमा रानी के लिए यह सिर्फ एक केस नहीं था, बल्कि एक मासूम जिंदगी की तलाश थी.
उन्होंने परिवार के टूटे हुए चेहरों को देखा था, मां की सूनी आंखों और पिता की कांपती आवाज को सुना था. इन्हीं चेहरों ने उन्हें चैन से बैठने नहीं दिया. दिन-रात की परवाह किए बिना टीम ने टेक्निकल सर्विलांस, मोबाइल इनपुट्स और मुखबिरों से मिल रही जानकारी को जोड़कर एक जाल बुनना शुरू किया. मुकुंदपुर से लेकर आसपास की कॉलोनियों, दोस्तों, रिश्तेदारों और हर उस जगह तक पूछताछ हुई, जहां बच्ची के कदम पड़ सकते थे.
आखिरकार एक पुख्ता इनपुट मिला, जिसने जांच की दिशा बदल दी. जगराम चौक के पास की हलचल ने संकेत दिया कि कहानी यहीं खत्म नहीं होती. तेज और सूझबूझ भरी कार्रवाई में महिला हेड कांस्टेबल सीमा रानी ने बच्ची को सुरक्षित ट्रेस कर लिया. शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि वह अपने एक दोस्त के साथ बिना परिवार को बताए पंजाब चली गई थी. डर, मासूमियत और पछतावे से भरी उसकी आंखें उस सफर की कहानी खुद बयां कर रही थीं. उसे समझाया गया, काउंसलिंग की गई, ताकि उसके मन का बोझ हल्का हो सके.
जब बच्ची को सुरक्षित भलस्वा डेयरी थाने की स्थानीय पुलिस के हवाले किया गया, तो वह पल किसी उपन्यास के सुखद अंत जैसा था. मां ने बेटी को सीने से लगाया, पिता की आंखों से बहते आंसू राहत की गवाही दे रहे थे. कई महीनों का अंधेरा उस एक पल में छंट गया. यह सफलता सिर्फ एक केस की फाइल बंद होने की कहानी नहीं थी, बल्कि इंस्पेक्टर संदीप स्वामी की निगरानी और एसीपी गिरीश कौशिक के मार्गदर्शन में काम कर रही एक समर्पित टीम की जीत थी.





