
Land for Job Scam: बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने लालू परिवार पर आरोप तय किए हैं। कुल 41 लोगों पर आरोप तय हुए हैं। इन पर अब मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी कर दिया है। आज लालू प्रसाद की अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती और बेटे तेजप्रताप के साथ सुनवाई को लेकर दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मामला दर्ज किया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा कि लालू और उनका परिवार आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे। उनकी ओर से व्यापक साजिश रची गई थी।
इस फैसले के बाद के यह स्कैम फिर से चर्चा में आ गया है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि लैंड फॉर जॉब स्कैम है क्या? दरअसल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का कहना है कि पूरी साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई। तब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। उक्त अवधि में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर स्थित रेलवे के अलग-अलग जोनों में बिहार के लोगों की ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां की गईं। आरोप है कि इसके बदले में इन लोगों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को दी। उसे बाद में उनके परिवार के सदस्यों ने अपने कब्जे में लिया।
अपनी-अपनी जमीन लालू परिवार के नाम कीजिए…
केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा है कि इस दौरान करीब सभी मामलों में नौकरी देने से पहले जमीनें ट्रांसफर की गईं। अधिकतर मामलों में गिफ्ट डीड तैयार कर ली गई थी। आरोप पत्र में यह भी दावा किया गया है कि जब लालू रेल मंत्री थे, तब उनके करीबी भोला यादव ने गांव में जाकर कहा था कि अपने परिजनों को नौकरी दिलाने के एवज में अपनी-अपनी जमीन लालू परिवार के नाम कीजिए। लालू परिवार के नाम जमीन लिखने वाले आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें लालू परिवार से नकद में भुगतान किया गया था।
लालू की बेटियां भी आरोपी
जांच एजेंसी ने मामले में सिर्फ लालू और उनके बेटों को नहीं, बल्कि उनकी बेटियों को भी आरोपी बनाया है। विशेषकर सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ चार्जशीट में आरोप दर्ज हैं। इन्हें भी बेहद मामूली कीमत पर जमीन ट्रांसफर की गई थी।
स्कैम में किसकी क्या भूमिका?
- लालू: रेल मंत्री थे, तब घोटाला हुआ।
- तेजस्वी यादव: आरोप है कि दिल्ली स्थित न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 150 करोड़ रुपए का बंगला सस्ते दाम में खरीदा। इसे भी रेलवे में नौकरी के लिए अप्लाई करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों से लिया गया।
- हृदयानंद चौधरी: राबड़ी की गौशाला के पूर्व कर्मचारी हैं। इन्होंने नौकरी के बदले एक अभ्यर्थी से जमीन लेकर लालू की बेटी हेमा को गिफ्ट कर दी थी।
- अमित कात्याल: लालू परिवार के लिए कंपनियां बनाईं। फिर बाद में मामूली पैस लेकर कंपनियों के शेयर लालू परिवार को दे दिए। इन्हें ईडी ने गिरफ्तार किया था।





