बहराइच में मां के पास बैठे बच्चे को खींच ले गए भेड़िये ने खाया, 3 महीने में 11 लोगों पर हमला

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बहराइच में मां के पास बैठे बच्चे को खींच ले गए भेड़िये ने खाया, 3 महीने में 11 लोगों पर हमला

यूपी के बहराइच में कैसरगंज तहसील क्षेत्र में रसूलपुर दरेहटा गांव में तीन साल के बच्चे को भेड़िए ने मार डाला। तड़के मां के पास बैठे बच्चे को खींच ले गया। मां और बच्चे की चीख पर ग्रामीण दौड़े मगर भेड़िया ओझल हो गया।

यूपी के बहराइच में कैसरगंज तहसील क्षेत्र में रसूलपुर दरेहटा गांव में तीन साल के बच्चे को भेड़िए ने मार डाला। तड़के मां के पास बैठे बच्चे को खींच ले गया। मां और बच्चे की चीख पर ग्रामीण दौड़े मगर भेड़िया ओझल हो गया। ग्रामीणों और वन विभाग की टीम को घर से 700 मीटर दूर मूंज के बीच बच्चे का अधखाया शव मिला है। परिवार में कोहराम है। भेड़िए के हमले में बीते नौ सितंबर से यह 11 वीं मौत है। दो बच्चे लापता भी हैं।

मनोहर का तीन वर्षीय बेटा अंश मां के साथ बैठा खेल रहा था। पलक झपकते ही भेड़िया उसे खींच ले गया। ग्रामीण दौड़े लेकिन कोहरा अधिक होने से भेड़िया दिखाई नहीं दिया। वन विभाग के साथ ग्रामीणों ने बच्चों को ढूंढते रहे। आठ घंटे के बाद घर से 700 मीटर दूरी मूंजे मे बच्चे का शव बरामद कर लिया। बच्चे के दोनों पैर भेड़िए चबा गया है।

वन विभाग के वीट प्रभारी जुबेर अहमद ने बताया सूचना पर वन विभाग टीम पहुंची। सर्च ऑपरेशन में शव बरामद हुआ है। फखरपुर थाना अध्यक्ष संजीव सिंह ने बताया घर से लगभग 700 मीटर दूर चारों तरफ गेहूं की फसल लगी हुई थी। उसी के पास मूंजा के बीच शव बरामद किया गया है। पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। डीएफओ राम सिंह का कहना है कि बच्चे का शव बरामद हुआ है।

तीन माह में11 लोगों को खा गया भेड़िया

कैसरगंज तहसील के मंझारा तौकली समेत विभिन्न गांवों में सितम्बर 2025 से भेड़िए के हमले शुरू हुए हैं तभी से दिन रात गश्त हो रही। गश्ती टीम को भनक नहीं लग रही। ट्रैप कैमरों में भेड़िए आ नहीं रहे। अचानक परिवार वालों के सामने से भेड़िए बच्चों को उठाकर ओझल हो रहे। सोमवार को फखरपुर के रसूलपुर के तीन वर्षीय अंश पुत्र मनोहर की मौत से वन विभाग के अधिकारी खासे बेचैन हैं। अब तक 11 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि वन विभाग ने छह भेड़ियों को मार गिराने में भी कामयाबी पाई है।

कड़ाके की सर्दी में लोगों का सुख चैन छिन गया। नौ सितंबर को कैसरगंज के पराग पुरवा से शुरू हुए हिंसक भेड़ियों के आतंक ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। जनपद के विभिन्न गांवों में अब तक इन खूंखार भेड़ियों के 60 हमलों में नौ मासूमों सहित 11 लोगों की मौत हो गई। दो मासूमों 20 सितंबर की सुबह मंझारा तौकली के गंधू झाला निवासी 3 वर्षीय अंकेश व 13 नवंबर की सुबह गोड़हिया नंबर 3 के लोधन पुरवा में 4 वर्षीय जाह्नवी को भेड़िया उठा ले गया था जिनका अभी तक पता नहीं चल सका है।

– नौ सितंबर मंझारा तौकली के पराग पुरवा निवासी चार वर्षीय ज्योति की मौत

– 12 सितंबर महसी के भौंरी के बहोरवा निवासी तीन माह की संध्या की मौत

– 24 सितंबर मंझारा तौकली के बाबा पटाव में तीन वर्षीय सोनी पुत्री बाबूलाल की मौत

– 30 सितंबर खालेपुरवा के 75 वर्षीय खेदन की मौत

– 30 सितंबर खालेपुरवा के 70 वर्षीय मनखिया पत्नी खेदन की मौत

– दो नवंबर फखरपुर ग्रा.पं.के कंदौली गोरछहनपुरवा निवासी डेढ़ वर्षीय शानवी पुत्री राकेश की मौत

– 28 नवंबर शाम गोड़हिया नं 3 के मल्लहन पुरवा के 5 वर्षीय स्टार पुत्र रोशन कुमार की मौत

– 28 नवंबर की रात देहात कोतवाली के खोरिया शफीक में मासूम सुनीता की मौत

– 06 दिसंबर गोड़हिया नंबर 3 मल्लाहन पुरवा में 4 माह के सुभाष पुत्र संतोष की मौत

– 13 दिसंबर की भोर गोड़हिया नंबर 4 के जरूआ द्वितीय में डेढ़ वर्षीय आरवी उर्फ पिंकी पुत्री राम कुंवारे की मौत

– 22 दिसंबर की सुबह तड़के फखरपुर के रसूलपुर के 3 वर्षीय अंश पुत्र मनोहर की मौत

इसके अलावा 46 लोग लहूलुहान हुए हैं वहीं सोलह सितंबर को सरायजगना की फमिंदा बानों पर भेड़िए ने झपट्टा मारा लेकिन परिजनों के दौड़ने पर वह बाल बाल बच गईं। उधर वन विभाग की कई टीमें लगातार सर्च आपरेशन में जुटी हैं। शूटरों के साथ रेस्क्यू टीमें ड्रोन कैमरों के साथ दिन रात काम्बिग कर रही हैं। प्रभावित गांवों व इलाकों में सीसीटीवी कैमरों से लोकेशन ट्रैक की जा रही है। रात भर गोले पटाखे दागे जाते हैं।

सैकड़ों अधिकारी-कर्मी लगे, पर राहत नहीं

वन विभाग, विकास, राजस्व व पुलिस की दर्जनों टीमों के सैकड़ों अधिकारी कर्मचारी हिंसक भेड़ियों के हमलों से बचाव एवं राहत कार्यों व जागरूकता तथा रेस्क्यू अभियान में पसीना बहा रहे हैं। वहीं शातिर भेड़िए सिलसिलेवार हमले कर मासूमों निशाना बनाकर प्रशासन को खुली चुनौती दे रहे हैं। अब अवाम की जुबान पर एक सवाल है कि आखिर कब थमेगा मासूमों की मौत का सिलसिला व खूनी भेड़ियों का आतंक।

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